यमराज को आदेश देने के लिए कोलकाता हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका
देश में समय नवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस पर्व के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। हमारे देश में धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं को बहुत महत्व दिया जाता है। इसका कारण है हमारे देश की संस्कृति और सभ्यता है। जिसने हमें एक सूत्र में बांधकर रखा है। मगर क्या अपने देवी-देवताओं को कभी अदालत का चक्कर काटते हुए या कानूनी दांवपेच में फंसते हुए देखा या सुना है। यदि नहीं तो आज हम आपको एक ऐसे ही वाकया के बारे में बताएंगे।
दरअसल कोलकाता हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। जिसमें यह कहा गया है कि अदालत यमराज को आदेश दे कि वह दोषियों को सजा भुगतने के लिए यमलोक से वापस पृथ्वी पर भेजें। यदि वो ऐसा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ अवमानना का मुकदमा चलाया जाना चाहिए। इस तरह की याचिक के बाद सब अचरज में आ गए हैं। अब हम आपको बताते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है।
ऐसी है यमराज को आदेश देने वाली याचिका की कहानी
दरअसल यह बात 1984 की है जब समर सिंह के बेटे ईश्वर और प्रदीप का किसी दूसरे पक्ष के साथ किसी बात को लेकर विवाद हो गया। विवाद में दूसरे पक्ष के एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई। जिसके बाद 1987 में एडिशनल जज ने तीनों आरोपियों को पांच 5 साल की सजा सुनाई। जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में अपील की हाई कोर्ट ने एक आदेश पारित कर तीनों की सजा पर रोक लगा दी। परंतु 2006 में तीनों आरोपियों में से दो आरोपी समर सिंह और प्रदीप की मृत्यु हो गई।
पीड़ित परिवार के वकील का प्रमोशन हो गया और वह जज बन गए। ऐसे में वकील ना होने की वजह से वह अदालत को यह नहीं बता पाए कि आरोपी में से दो की मौत हो चुकी है। अब पीड़ित परिवार ने हाई कोर्ट में यह याचिका दायर की है कि वह यमराज को आदेश दें कि वह आरोपियों को यमलोक से वापस पृथ्वी पर भेजें ताकि वह अपनी सजा पूरी कर सकें।
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